राजस्थान में 16वीं विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और इससे ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस ने विधानसभा सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर दिया है। कांग्रेस के इस कदम ने राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने इस पर नाराजगी जताई है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने मजबूरी में यह फैसला लिया।
क्यों हुआ बहिष्कार?
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने एक सितंबर से शुरू हो रहे चौथे सत्र के लिए गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए सभी दलों के नेताओं को इस बैठक में बुलाया गया था। कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और मुख्य सचेतक रफीक खान को इस बैठक में शामिल होना था, लेकिन दोनों ही इस बैठक में नहीं पहुँचे।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज नहीं सुन रही है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बहिष्कार की वजह बताई। उन्होंने लिखा, "सरकार का रवैया एकतरफा है।" उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी सरकार सत्ता में थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने सभी 200 विधायकों और 25 सांसदों की बात सुनी थी। लेकिन मौजूदा सरकार सिर्फ़ अपने विधायकों, सांसदों और चुनाव हारे हुए उम्मीदवारों से ही बात कर रही है। जूली ने साफ़ तौर पर कहा कि विपक्ष की आवाज़ को पूरी तरह से दबाया जा रहा है, और इसीलिए कांग्रेस ने इस बैठक का बहिष्कार किया। विधानसभा को लेकर भाजपा सरकार की नीयत शुरू से ही ठीक नहीं रही है। विधानसभा अध्यक्ष चाहते हैं कि सत्र लंबा चले, लेकिन सरकार चाहती है कि विधानसभा सत्र कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाए ताकि जवाबदेही सुनिश्चित न हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक 2 सितंबर को होगी, जिसमें प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे। इसी बैठक में आगे की रणनीति पर फ़ैसला लिया जाएगा।
भाजपा का पलटवार
कांग्रेस के इस क़दम पर भाजपा ने भी कड़ा पलटवार किया है। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस के इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "ऐसा लग रहा है कि विपक्ष मैदान छोड़कर भाग रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि दोनों कांग्रेस नेताओं ने जानबूझकर इस बैठक का बहिष्कार किया। गर्ग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में अंदरूनी कलह चल रही है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कांग्रेस की अंदरूनी कलह, 'डोटासरा बनाम जूली' की लड़ाई, शायद फिर से सामने आ गई है।" उन्होंने कांग्रेस के इस फैसले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यह राजस्थान और विपक्ष, दोनों के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष और सरकार, दोनों सदन में सकारात्मक माहौल बनाना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा करके उस प्रयास को नुकसान पहुँचाया है।
हंगामादार हो सकता है सत्र
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और मुद्दे उठाए जाने की उम्मीद है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सदन की कार्यवाही में भाग लेंगे, लेकिन जिस तरह से सत्र शुरू होने से पहले ही टकराव शुरू हो गया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिल सकती है। सरकार और विपक्ष, दोनों के बीच आपसी तालमेल की कमी सत्र को हंगामेदार बना सकती है, जिसका असर जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा पर पड़ सकता है।
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