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'परम सुंदरी' मूवी रिव्यू : प्यार, हंसी और दिल को छू लेने वाले पल- साल की बेहतरीन रोमांटिक कॉमेडी

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निर्देशक – तुषार जलोटा, कलाकार – सिद्धार्थ मल्होत्रा, जाह्नवी कपूर, रेंजी पणिक्कर, सिद्धार्थ शंकर, मनजोत सिंह, संजय कपूर, इनायत वर्मा, अवधि – 136 मिनट, रेटिंग – 4

एक ऐसी दुनिया में जहां प्यार स्क्रीन और स्वाइप्स पर टिका नजर आता है, परम सुंदरी अपने दिल की सुनने की खूबसूरती पर आधारित एक रोमांस है. डिजिटल जगत ने दुनिया को हमारी मुट्ठी में जरूर समेट दिया है, लेकिन हमें बार-बार खुद से दूर भी किया है, तब यह फिल्म हमें यह याद दिलाती है कि हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी क्या है- सच्चा प्यार और रिश्ता! यह फिल्म प्यार के सबसे सच्चे रूप को दर्शाती है.

जब प्यार को डेटिंग ऐप्स के कम्पैटिबिलिटी रेटिंग्स से मापा जाने लगा है, तब यह फिल्म हमें सच्चे दिल से और ईमानदारी से ये याद दिलाती है कि कोई भी एल्गोरिदम, एआई या आधुनिक ऐप, केमिस्ट्री, टाइमिंग या सच्चे जुड़ाव को माप नहीं सकता.

परम सुंदरी की पहली ही झलक से आपको पता चल जाता है कि आपके लिए कुछ खास होने वाला है. इसमें एक खास जादू है जो बनावटी नहीं हो लगता. जब ऐक्टिंग, डायरेक्शन, राइटिंग और बाकी सभी तकनीकें एक साथ काम करती हैं, तो कुछ खास बनता है. आजकल नोटिफ़िकेशन की लगातार आती आवाज के बीच, ऐसा सुकून देने वाला और शानदार अनुभव मिलना बहुत मुश्किल और खास है.

निर्देशक तुषार जलोटा की यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि परदे पर दिखाया गया एक जीता-जागता, धड़कता दिल है. यह एक ऐसे सपने में कदम रखने जैसा है जो यादों और भावनाओं से बुना गया है. ‘परम सुंदरी’ एक सुकून भरा अनुभव देती है जो हमेशा नया और ताजा लगता है. भावनाओं को बनावटी नहीं बनाया जा सकता, उन्हें महसूस किया जा सकता है और यह भावनाओं, रंगों, मनोदशाओं और एक दूसरे इंसान से जुड़ने का एक संपूर्ण अनुभव है.

फिल्म में उत्तर-दक्षिण की प्रेम कहानी है, जिसमें दो बिल्कुल अलग लोग एक ऐप की मदद से मिलते हैं. इसे एक जबरदस्त पटकथा, एक जबरदस्त जोड़ी और भावनाओं से भरपूर साउंडट्रैक ने और भी बेहतर बना दिया है.

फिल्म की कहानी परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दिल्ली का एक तेज-तर्रार, टेक-सेवी बिजनेसमैन है. परम का सपना एक ऐसा ऐप बनाने में निवेश करने का है जिससे लोग अपने “जीवनसाथी” को ढूंढ सकें.

जब परम के पिता (संजय कपूर) उसकी हरकतों से तंग आकर उसे एक महीने में उसे अपनी ही ऐप से जीवनसाथी ढूंढने की चुनौती देते हैं, तो हमारी मुलाकात सुंदरी (जाह्नवी कपूर) से होती है. सुंदरी एक साधारण और बिंदास मलयाली लड़की है जिसकी सादगी और सच्चाई को किसी ऐप में नहीं ढाला जा सकता. इसके बाद फिल्म में डिजिटल प्रेम बनाम सच्चे एहसास की एक रोचक और आश्चर्यजनक रूप से गहन पड़ताल होती है.

दोनों मुख्य कलाकारों के बीच का प्यार फिल्म में जान डाल देता है. एक ऐप के ज़रिए शुरू हुई बात जल्द ही भावनाओं, प्यार, विश्वास और दिल के एक ऐसे मनमोहक मिश्रण में बदल जाती है, जिसे नियंत्रित करना नामुमकिन है, बस महसूस किया जा सकता है.

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने परम के किरदार में जान डाल दी है. उनका किरदार बेहद आकर्षक है, उनकी कॉमेडी की टाइमिंग परफेक्ट है और वो अपने किरदार में काफी गहराई दिखाते हैं. हालांकि, ये जान्हवी कपूर ही हैं जिन्होंने सुंदरी के रूप में अपने अब तक के करियर की सबसे दमदार परफॉर्मेंस से सबका दिल जीत लिया है. उनका अभिनय सशक्त है और वो एक-एक बारीकी पर ध्यान देती हैं. उन्होंने इस किरदार को सिर्फ निभाया नहीं है, बल्कि जिया है. चाहे वो लहजा हो, कपड़े हों या बर्ताव, उन्होंने हर चीज को बड़ी ही सहजता से निभाया है. यह जाह्नवी के करियर की एक यादगार परफॉर्मेंस है, जो उन्हें एक बेहतरीन अभिनेत्री साबित करती है.

परम और सुंदरि की केमिस्ट्री कमाल की है, जो हिचकिचाहट भरी चिंगारी से शुरू होकर धीरे-धीरे गहरी दोस्ती में बदल जाती है. उनका प्यार नया भी है और सदियों पुराना भी. यह ऐसा प्यार है जिसे social media पर रहने वाले आज के युवा बहुत अच्छे से समझ पाएंगे.

फिल्म में सहयोगी कलाकारों ने भी जान डाल दी है. संजय कपूर अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और सहज अंदाज़ से तब हंसाते हैं जब माहौल बहुत गंभीर हो जाता है. उनके मजेदार एक्सप्रेशंस और वन-लाइनर्स इस गंभीर ड्रामा में कॉमेडी का तड़का लगाते हैं. मनजोत सिंह का किरदार भी बहुत फनी है, इनायत वर्मा दर्शकों का दिल जीत लेती हैं, और रेंजी पणिकर के साथ सिद्धार्थ शंकर सुंदरी का अभिनय फिल्म की दुनिया को एकदम वास्तविक बना देता है.

यह फिल्म देखने में बेहद खूबसूरत है. दिल्ली के चमकते स्टार्टअप कल्चर से लेकर केरल की शांत और हरी-भरी वादियों तक, फिल्म बहुत भावनात्मक और लंबी भौगोलिक दूरी तय करती है. फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन बहुत उम्दा है और कलाकारों की पोशाक (खासकर जाह्नवी की खूबसूरत साड़ियां और परम का सिंपल लेकिन स्टाइलिश लुक) उनके किरदारों को सहजता से दर्शाती हैं.

फिल्म का संगीत कमाल का है, जो फिल्म की भावनात्मक रीढ़ है. छह बेहतरीन गानों के साथ, फिल्म का म्यूजिक हर रोमांटिक पल में जान डाल देता है. चाहे वो चुलबुला ‘परदेसिया’ हो, दिलकश ‘भीगी साड़ी’ हो, फिर दिल को छू लेने वाला ‘सुन मेरे यार वे’ और ‘चांद कागज का’ हो, हर गाना एकदम सही बैठता है. टाइटल सॉन्ग ‘सुंदरी के प्यार में’ पहले से ही चार्टबस्टर है.

मैडॉक फिल्म्स के तहत दिनेश विजान द्वारा निर्मित, फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह उस पीढ़ी की कहानी को ईमानदारी से दिखाती है, जो प्यार को एल्गोरिदम के भरोसे छोड़ चुकी है. यह फिल्म कोई शिक्षा नहीं देती, बल्कि प्यार और प्यार में होने के एहसास को बहुत ही कोमलता से महसूस कराती है. यह अनुभव हमें याद दिलाता है कि प्यार कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप स्वाइप करके या कार्ट में डालकर पाएं, बल्कि वास्तव में प्यार तो उलझा हुआ, जोखिम भरा और दिल से जुड़ा एक बहुत ही सच्चा इंसानी एहसास है.

‘परम सुंदरी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह दोबारा प्यार में पड़ने का एक मौका है!

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